Saturday, November 7, 2015

आस्की (ASCII) कोड क्या होता है

American Standard Code For Information Interchange

आज हम कंप्यूटर पर आसनी जो कुछ भी लिखते हैं वो आस्की में ही लिखा होता है. प्रत्येक कंप्यूटर प्रयोगकर्ता अंकों, अक्षरों तथा संकेतों के लिए बाइनरी सिस्टम पर आधारित कोड का निर्माण करके कंप्यूटर को परिचालित कर सकता है! लेकिन उसके कोड केवल उसी के द्वारा प्रोग्रामों और आदेशों के लिए लागू होंगे! इससे कंप्यूटर के प्रयोगकर्ता परस्पर सूचनाओं का आदान प्रदान तब तक नहीं कर सकते जब तक कि वे एक -दूसरे द्वारा इस्तेमाल किये हुए कोड संकेतों से परिचित न हों! सूचनाओं के आदान प्रदान की सुविधा के लिए अमेरिका मे एक मानक कोड तैयार किया गया है जिसे अब पूर विश्व मे मान्यता प्राप्त है! इसे आस्की (ASCII) के नाम से जाना जाता है! इसमे प्रत्येक अंक, अक्षरों वा संकेत को 8 बीटो से दर्शाया गया है! इन 8स्थानों पर केवल 0 और 1 की संख्या ही लिखी गयी है!

Friday, November 6, 2015

कम्प्यूटर की मूल इकाईयॉं

कंप्यूटर की मूल इकाइयों का मतलब कंप्यूटर की उन बातों से है जिनसे कंप्यूटर की गणनाओं का काम प्रारंभ होता है.
बिट 
बिट अर्थात Binary digT, कम्प्यूटर की स्मृति की सबसे छोटी इकाई है । यह स्मृति में एक बायनरी अंक 0 अथवा 1 को संचित किया जाना प्रदर्शित करता है । यह बाइनरी डिजिट का छोटा रूप है. यहाँ एक सवाल उठता हैं की बिट ० और १ ही क्यू होता है ३-४ क्यू नहीं ? तो इसका जवाब दो तरह से आता हैं,

– चूकी गणितीय गणना के लिये विज्ञानियों को ऐसा अंक चाहीये था जो किसी भी तरह के गणना को आगे बढ़ाने या घटाने पर गणितीय उतर पर असर न डाले तो केवल ० एक मात्र एसी संख्या हैं जिसे किसी भी अंक के साथ जोड़ने या घटाने पर कोई फर्क नहीं पड़ता और १ एक मात्र ऐसी संख्या हैं जिसे किसी अंक के साथ गुणा या भाग देने पर कोई फर्क नहीं पड़ता.
-दूसरी तरफ इलेक्ट्रॉनिकस में हम जानते हैं की ० और १ क्रमशः ऑन और ऑफ को दिखलाता हैं. कंप्यूटर भी इलेक्ट्रॉनि सिग्नल को ही पहचानता हैं इस कारण ० और १ का उपयोग किया जाता हैं.
बाइट 
यह कम्प्यूटर की स्मृति (memory) की मानक इकाई है । कम्प्यूटर की स्मृति में की-बोर्ड से दबाया गया प्रत्येक अक्षर, अंक अथवा विशेष चिह्न ASCII Code में संचित होते हैं । प्रत्येक ASCII Code 8 byte का होता है । इस प्रकार किसी भी अक्षर को स्मृति में संचित करने के लिए 8 बिट मिलकर 1 बाइट बनती है ।
कैरेक्टर 
संख्यांको के अलावा वह संकेत है जो भाषा और अर्थ बताने के काम आते है । उदाहरण के लिए हम देखे
a b c d e f g h i j k l m n o p q r s t u v w x y z A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z 0 1 2 3 4 5 6 7 8 9 ! @ # $ % ^ & * ( ) _ – = + | \ ` , . / ; ‘ [ ] { } : ” < > ?
कम्प्यूटर सिस्टम सामान्यतः कैरेक्टर को संचित करने के लिए ASCII कोड का उपयोग करते हैं । प्रत्येक कैरेक्टर 8 बिटस का उपयोग करके संचित होता है ।

कम्प्यूटर की विशेषताएँ

कम्प्यूटर की विशेषताएँ

प्रत्येक कम्प्यूटर की कुछ सामान्य विशेषताएँ होती है । कम्प्यूटर केवल जोड करने वाली मशीन नही है यह कई जटिल कार्य करने मे सक्षम है।कम्प्यूटर की निम्न निशेषताएँ है। 
वर्ड-लेन्थ
डिजिटल कम्प्यूटर केवल बायनरी डिजिट पर चलता है। यह केवल 0 एवं 1 की भाषा समझता है। आठ बिट के समूह को बाइट कहा जाता है । बिट की संख्या जिन्हे कम्प्यूटर एक समय मे क्रियान्वित करता है वर्ड लेंन्थ कहा जाता है । सामान्यतया उपयोग मे आने वाले वर्ड लेन्थ 8,16,32,64 आदि है। वर्ड लेन्थ के द्वारा कम्प्यूटर की शक्ति मापी जाती है।
तीव्रता
कम्प्यूटर बहुत तेज गति से गणनाएँ करता है माइक्रो कम्प्यूटर मिलियन गणना प्रति सेकंड क्रियांवित करता है। 

संचित युक्ति
कम्प्यूटर की अपनी मुख्य तथा सहायक मेमोरी होती है। जो कि कम्प्यूटर को आंकडो को संचित करने मे सहायता करती है । कम्प्यूटर के द्वारा सुचनाओ को कुछ ही सेकंड मे प्राप्त किया जा सकता है । इस प्रकार आकडो को संचित करना एवं बिना किसी त्रुटि के सुचनाओ को प्रदान करना कम्प्यूटर की महत्वपूर्ण विशेषता है 
शुद्धता
कम्प्यूटर बहुत ही शुद्ध मशीन है । यह जटिल से जटिल गणनाएँ बिना किसी त्रुटि के करता है ।
वैविघ्यपूर्ण
कम्प्यूटर एक वैविघ्यपूर्ण मशीन है यह सामान्य गणनाओ से लेकर जटिल से जटिल गणनाएँ करने मे सक्षम है । मिसाइल एवं उपग्रहो का संचालन इन्ही के द्वारा किया जाता है। दूसरे शब्दो मे हम कह सकते है कि कम्प्यूटर लगभग सभी कार्यो को कर सकता है एक कम्प्यूटर दूसरे कम्प्यूटर से सुचना का आदान प्रदान कर सकता है । कम्प्यूटर की आपस मे वार्तालाप करने की क्षमता ने आज ईंटरनेट को जन्म दिया है ।जो कि विश्व का सबसे बडा नेटवर्क है ।
स्वचलन
कम्प्यूटर एक समय मे एक से अधिक कार्य करने मे सक्षम है ।
परिश्रमशीलता
परिश्रमशीलता का अर्थ है कि बिना किसी रूकावट के कार्य करना । मानव जीवन थकान ,कमजोरी,सकेन्द्रण का आभाव आदि से पिडित रङता है।मनुष्य मे भावनाए ङोती है वे कभी खुश कभी दुखी होते है । इसलिए वे एक जैसा काम नही कर पाते है । परंतु कम्प्यूटर के साथ ऐसा नही है वह हर कार्य हर बार बहुत ही शुद्धता एवं यथार्थता से करता है .

कम्प्यूटर अपना काम कैसे करता है ?

कम्प्यूटर अपना काम कैसे करता है ?

1.इनपुट के साधन जैसे की-बोर्ड, माउस, स्कैनर आदि के द्वारा हम अपने निर्देश,प्रोग्राम तथा इनपुट डाटा प्रोसेसर को भेजते हैं ।
2.प्रोसेसर हमारे निर्देश तथा प्रोग्राम का पालन करके कार्य सम्पन्न करता है ।
3.भविष्य के प्रयोग के लिए सूचनाओं को संग्रह के माध्यमों जैसे हार्ड डिस्क, फ्लापी डिस्क आदि पर एकत्र किया जा सकता है ।
4.प्रोग्राम का पालन हो जाने पर आउटपुट को स्क्रीन, प्रिंटर आदि साधनों पर भेज दिया जाता है ।
 सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट – सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को हिन्दी में केन्द्रीय विश्लेषक इकाई भी कहा जाता है । इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह कम्प्यूटर का वह भाग है, जहां पर कम्प्यूटर प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है ।  सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सी.पी.यू.) को पुनः तीन भागों में बांटा जा सकता है
1. कन्ट्रोल यूनिट
2. ए.एल.यू.
3. स्मृति
कन्ट्रोल यूनिट 
कन्ट्रोल यूनिट का कार्य कम्प्यूटर की इनपुट एवं आउटपुट युक्तियों को नियन्त्रण में रखना है । कन्ट्रोल यूनिट के मुख्य कार्य है –
1. सर्वप्रथम इनपुट युक्तियों की सहायता से सूचना/डेटा को कन्ट्रोलर तक लाना ।
2. कन्ट्रोलर द्वारा सूचना/डेटा को स्मृति में उचित स्थान प्रदान करना ।
3. स्मृति से सूचना/डेटा को पुनः कन्ट्रोलर में लाना एवं इन्हें ए.एल.यू. में भेजना ।
4. ए.एल.यू.से प्राप्त परिणामों को आउटपुट युक्तियों पर भेजना एवं स्मृति में उचित स्थान प्रदान करना ।
ए.एल.यू.
कम्प्यूटर की वह इकाई जहां सभी प्रकार की गणनाएं की जा सकती है, अर्थमेटिक एण्ड लॉजिकल यूनिट कहलाती है ।
स्मृति 
किसी भी निर्देश, सूचना अथवा परिणाम को संचित करके रखना ही स्मृति कहलाता है । कम्प्यूटर के सी.पी.यू. में होने वाली समस्त क्रियायें सर्वप्रथम स्मृति में जाती है । तकनीकी रूप में मेमोरी कम्प्यूटर का कार्यकारी संग्रह है । मेमोरी कम्प्यूटर का अत्यधिक महत्वपूर्ण भाग है जहां डाटा, सूचना और प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान स्थित रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपलब्ध होते हैं ।
इनपुट युक्ति
आमतौर पर की-बोर्ड एवं माउस है । इनपुट युक्ति एक नली के समान है जिसके द्वारा आँकडे एवं निर्देश कम्प्यूटर में प्रवेश करते है ।
आउटपुट युक्ति
मुख्य रूप से स्क्रीन एवं प्रिंटर इसका उदाहरण है । इसके अलावा वे सभी युक्ति जो आपको बताए की कम्प्यूटर ने क्या संपादित किया है आउटपुट युक्ति कहलाती है ।
संचित युक्ति
यह कम्प्यूटर मे स्थायी तौर पर बहुत अधिक मात्रा मे आंकडो को संचित करने की अनुमती प्रदान करता है । उदाहरण डिस्क ड्राइव, टेप ड्राइव ।

कम्प्यूटर की पीढ़ी

कम्प्यूटर यथार्थ मे एक आश्चर्यजनक मशीन है। कम्प्यूटर को विभिन्न पीढ़ी मे वर्गीकृत किया गया है। समय अवधि के अनुसार कम्प्यूटर का वर्गीकरण नीचे दिया गया है।
प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर ( 1945 से 1956)
द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर (1956 से 1963)
तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटर (1964 से 1971)
चतुर्थ पीढ़ी के कम्प्यूटर(1971 से वर्तमान)
पंचम पीढ़ी के कम्प्यूटर (वर्तमान से वर्तमान के उपरांत) 
प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर ( 1945 से 1956)
सन् 1946 मे पेनिसलवेनिया विश्वविधालय के दो ईंजिनियर जिनका नाम प्रोफेसर इक्रर्टऔर जॉन था। उन्होने प्रथम डिजिटल कम्प्यूटर का निर्माण किया। जिसमे उन्होने वैक्यूम ट्यूब का उपयोग किया था। उन्होने अपने नए खोज का नाम इनिक(ENIAC) रखा था। इस कम्प्यूटर मे लगभग 18,000 वैक्यूम ट्यूब , 70,000 रजिस्टर और लगभग पांच मिलियन जोड़ थे । यह कम्प्यूटर एक बहुत भारी मशीन के समान था । जिसे चलाने के लिए लगभग 160 किलो वाट विद्युत उर्जा की आवशयकता होती थी।
द्वितीय पीढी के कम्प्यूटर ( 1956 से 1963 ) 
सन् 1948 मे ट्रांजिस्टर की खोज ने कम्प्यूटर के विकास मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा की । अब वैक्यूम ट्यूब का स्थान ट्रांजिस्टर ने ले लिया जिसका उपयोग रेडियो ,टेलिविजन , कम्प्यूटर आदि बनाने मे किया जाने लगा । जिसका परिणाम यह हुआ कि मशीनो का आकार छोटा हो गया । कम्प्यूटर के निर्माण मे ट्रांजिस्टर के उपयोग से कम्प्यूटर अधिक उर्जा दक्ष ,तीव्र एवं अधिक विश्वसनिय हो गया । इस पीढी के कम्प्यूटर महंगे थे । द्वितीय पीढी के कम्प्यूटर मे मशीन लेंग्वेज़ को एसेम्बली लेंग्वेज़ के द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया । एसेम्बली लेंग्वेज़ मे कठिन बायनरी कोड की जगह संक्षिप्त प्रोग्रामिंग कोड लिखे जाते थे ।
तृतिय पीढी के कम्प्यूटर (1964 से 1975) 
यद्यपि वैक्यूम ट्यूब का स्थान ट्रांजिस्टर ने ले लिया था परंतु इसके उपयोग से बहुत अधिक मात्रा मे ऊर्जा उत्पन्न होती थी जो कि कम्प्यूटर के आंतरिक अंगो के लिए हानिकारक थी । सन् 1958 मे जैक किलबे ने IC(integrated cercuit ) का निर्माण किया । जिससे कि वैज्ञानिको ने कम्प्यूटर के अधिक से अधिक घटको को एक एकल चिप पर समाहित किया गया , जिसे सेमीकंडकटर कहा गया, पर समाहित कर दिया । जिसका परिणम यह हुआ कि कम्प्यूटर अधिक तेज एवं छोटा हो गया ।
चतुर्थ पीढी के कम्प्यूटर 
सन् 1971 मे बहुत अधिक मात्रा मे सर्किट को एक एकल चिप पर समाहित किया गया । LSI (large scale
integrated circuit ) VLSI(very large scale integratd circuit ) ULSI(ultra large scale integrated circuit ) मे बहुत अधिक मात्रा मे सर्किट को एक एकल चिप पर समाहित किया गया । सन् 1975 मे प्रथम माइक्रो कम्प्यूटर Altair 8000 प्रस्तुत किया गया ।
सन् 1981 मे IBM ने पर्सनल कम्प्यूटर प्रस्तुत किया जिसका उपयोग घर, कार्यालय एवं विघालय मे होता है । चतुर्थ पीढी के कम्प्यूटर मे लेपटॉप का निर्माण किया गया । जो कि आकार मे ब्रिफकेस के समान था । plamtop का निर्माण किया गया जिसे जेब मे रखा जा सकता था
पंचम पीढी के कम्प्यूटर (वर्तमान से वर्तमान के बाद)
पंचम पीढी के कम्प्यूटर को परिभाषित करना कुछ कठिन होगा । इस पीढी के कम्प्यूटर लेखक सी क्लार्क के द्वारा लिखे उपन्यास अ स्पेस ओडिसी मे वर्णित HAL 9000 के समान ही है । ये रियल लाइफ कम्प्यूटर होंगे जिसमे आर्टिफिशल इंटेलिजेंस होगा ।
आधुनिक टेक्नॉलाजी एवं विज्ञान का उपयोग करके इसका निर्माण किया जाएगा जिसमे एक एकल सी. पी. यू . की जगह समानान्तर प्रोसेसिंग होगी । तथा इसमे सेमीकंडकटर टेक्नॉलाजी का उपयोग किया जाएगा जिसमे बिना किसी प्रतिरोध के विद्युत का बहाव होगा जिससे सूचना के बहाव की गति बढेगी । 

पर्सनल कम्प्यूटर

पर्सनल कम्प्यूटर माइक्रो कम्प्यूटर समानार्थक से जाने वाले वैसे कम्प्यूटर प्रणाली है जो विशेष रूप से व्यक्तिगत अथवा छोटे समूह के द्वारा प्रयोग मे लाए जाते हैं। इन कम्प्यूटरों को बनाने में माइक्रोप्रोसेसर मुख्य रूप से सहायक होते है पर्सनल कम्प्यूटर निर्माण विशेष क्षेत्र तथा कार्य को ध्यान में रखकर किया जाता है। उदाहरणार्थ- घरेलू कम्प्यूटर तथा कार्यालय में प्रयोगकिये जाने वाले कम्प्यूटर। बजारमें, छोटे स्तर की कम्पनियों अपने कार्यालयों के कार्य के लिए पर्सनल कम्प्यूटर को प्राथमिकता देते हैं।
पर्सनल कम्प्यूटर के मुख्य कार्यो में क्रीड़ा-खेलना, इन्टरनेट का प्रयोग , शब्द-प्रक्रिया इत्यादि शामिल हैं। पर्सनल कम्प्यूटर के कुछ व्यवसायिक कार्य निम्नलिखित हैं-

1. कम्प्यूटर सहायक रूपरेखा तथा निर्माण
2.
इन्वेन्ट्री तथा प्रोडक्शन कन्ट्रोल
3.
स्प्रेडशीट कार्य
4.
अकाउन्टिंग
5.
सॉफ्टवेयर निर्माण
6.
वेबसाइट डिजाइनिंग तथा निर्माण
7.
सांख्यिकी गणना
पर्सनल कम्प्यूटर का मुख्य भाग
माइक्रोप्रोसेसर वह चीप होती जीस पर कंट्रोल यूनिट और . एल. यू. एक परिपथ होता है। माइक्रोप्रोसेसर चिप तथा अन्य डिवाइस एक इकाई में लगे रहते है, जिसे सिस्टम यूनिट कहते है। पी,सी. में एक सिस्टम यूनिट, एक मनिटर या स्क्रीन एक की बोर्ड एक माउस और अन्य आवश्यक डिवाइसेज, जैसे प्रिंटर, मॉडेम, स्पीकर, स्कैनर, प्लॉटर , ग्राफिक टेबलेट , लाइच पेन आदि होते हैं।
पर्सनल कम्प्यूटर का मूल सिद्धान्त 
पी.सी एक प्रणाली है जिसमें डाटा और निर्देशों को इनपुट डिवाइस के माध्यम से स्वीकार किया जाता है। इस इनपुट किये गये डाटा निर्देशों को आगे सिस्टम यूनिट में पहुँचाया जाता है, जहाँ निर्देशों के अनुसार सी. पी. यू. डाटा पर क्रिया या प्रोसेसिंग का कार्य करता है और परिचय को आउटपुट यूनिट मॉनीटर या स्क्रीन पर भेज देता है। यह प्राप्त परिणाम आउटपुट कहलाता है। पी. सी में इनपुट यूनिट में प्रायः की-बोर्ड और माउस काम आते है जबकि आउटपुट यूनिट के रूप में मॉनिटर और प्रिटर काम आते हैं।